समाजसेवी संदीप सिंघल ने कहा—तिरंगा राष्ट्र की आत्मा, इसका सम्मान हर भारतीय का कर्तव्य:
फरीदाबाद — भारत का राष्ट्रीय ध्वज, जिसे हम गर्व से ‘तिरंगा’ कहते हैं, केवल एक झंडा नहीं, बल्कि हमारी स्वतंत्रता, गौरव और एकता का जीवंत प्रतीक है। इसके तीन रंग साहस, शांति और समृद्धि के संदेशवाहक हैं, जबकि मध्य का अशोक चक्र न्याय और सतत प्रगति का प्रतीक है। समाजसेवी एवं विचारक संदीप सिंघल ने कहा कि तिरंगा हमारे राष्ट्र की आत्मा है और इसका सम्मान हर भारतीय का कर्तव्य होना चाहिए। तिरंगे का गौरवपूर्ण सफर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है—1906 में कोलकाता में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में इसे विदेश की धरती पर लहराया, 1921 में पिंगली वेंकैया ने गांधीजी के सुझाव पर चरखे वाला ध्वज तैयार किया, 1931 में यह केसरिया, सफेद और हरे रंग के साथ स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना और 1947 में अशोक चक्र जोड़कर इसे वर्तमान स्वरूप मिला। केसरिया रंग साहस, त्याग और बलिदान, सफेद रंग शांति, सत्य और पवित्रता, हरा रंग जीवन, समृद्धि और धरती की हरियाली का द्योतक है, जबकि 24 तीलियों वाला नीला अशोक चक्र न्याय और गतिशीलता का संदेश देता है।

ध्वज संहिता के अनुसार इसका अनुपात 3:2 होना चाहिए, यह अन्य झंडों से ऊँचा रहे, कभी जमीन को न छुए और क्षतिग्रस्त होने पर सम्मानपूर्वक जलाया जाए। 2022 में नियमों में बदलाव के बाद अब इसे किसी भी कपड़े में बनाया जा सकता है और 24 घंटे फहराया जा सकता है, बशर्ते गरिमा बनी रहे। 15 अगस्त 1947 को जब लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा पहली बार लहराया गया, तो पूरे देश में गर्व और बलिदान की लहर दौड़ पड़ी थी। आज फरीदाबाद में भी ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों से तिरंगे का सम्मान जन-जन तक पहुँच रहा है, लेकिन सच्चा देशप्रेम तभी है जब इसका आदर केवल उत्सवों में नहीं, बल्कि हमारे रोज़मर्रा के आचरण में भी झलके, क्योंकि—”जब तक दिल में तिरंगा है, तब तक भारत की आत्मा जीवित है।”

संदीप सिंघल
समाजसेवी एवं विचारक