भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में तीन विवादास्पद विधेयक पेश किए जिसके तहत लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार रहने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाया जा सकता है। विपक्ष ने इस विधेयक को कठोर करार देते हुए दावा किया है कि सरकार इसका इस्तेमाल मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों की मनमानी गिरफ्तारी के माध्यम से विपक्ष शासित राज्यों को अस्थिर करने के लिए करेगी। विधेयक की प्रतियां लोकसभा में फाड़कर गृह मंत्री अमित शाह की ओर फेंकी गईं। इसको लेकर सियासत तेज हो गई है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि विपक्ष किसका विरोध कर रहा है, नैतिकता का या भ्रष्टाचार का?
आख़िरकार, भारतीय राजनीति में अगर हम नैतिकता के आधार पर और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ इस्तीफा देने की बात करते हैं, और फिर कानून बनाने की बात करते हैं, तो विपक्ष इसका विरोध क्यों करता है? आज लड़ाई साफ है। भ्रष्टाचारियों के साथ कौन खड़ा है- विपक्ष; और भ्रष्टाचार से मुक्त कौन है- भाजपा। विपक्ष और संसद में हुई ऐसी कार्रवाइयों ने लोकतंत्र को शर्मसार किया है और यह भी दिखाया है कि विपक्ष भ्रष्टाचार के साथ खड़ा है और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। लोजपा (रामविलास) सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि विपक्ष कभी किसी विधेयक पर चर्चा नहीं करना चाहता। जब उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलता है, तो वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चेहरे पर कागज फेंकते हैं, वह भी संसद के अंदर; फिर उनमें और अपराधियों में क्या अंतर है? यह बेहद चौंकाने वाला है। बीजेपी सांसद रवि किशन ने कहा कि मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं, विपक्ष ने गुंडागर्दी की हदें पार कर दी हैं. उन्होंने कागज फेंके और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया…मैंने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा. मैं इस व्यवहार की निंदा करता हूं। भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि टीएमसी के लोग संसद में हंगामा कर रहे थे। उनके साथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल के सदस्य भी अपनी सीटों पर बैठकर हंगामा कर रहे थे। हम संसद में रचनात्मक कार्य करने जाते हैं। गर देश के गृह मंत्री कोई विधेयक लाए हैं, तो उनकी बात सुनना हमारा कर्तव्य है… हम इस तरह के व्यवहार की निंदा करते हैं। जैसे ही शाह विधेयकों को संयुक्त समिति के पास जाँच के लिए भेजने का प्रस्ताव रख रहे थे, तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं ने विधेयकों की प्रतियाँ फाड़कर गृह मंत्री पर फेंक दीं।
130वां संविधान संशोधन विधेयक भारत में लोकतंत्र को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा : ममता
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 की निंदा करते हुए आरोप लगाया कि यह एक सुपर-आपातकाल से भी बड़ा कदम है और यह भारत में लोकतांत्रिक युग को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा। केंद्र सरकार की बुधवार को संसद में तीन संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की योजना है, जिसके तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाया जा सकेगा। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया कि ए विधेयक देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खत्म कर देगा। उन्होंने कहा, मैं भारत सरकार द्वारा आज पेश किए जाने वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक की निंदा करती हूं।