बरसाती मौसम में गंदे पानी और दूषित खानपान से टायफाइड का खतरा तेजी से बढ़ गया है। शहर के एकॉर्ड अस्पताल में रोजाना 10 से 15 मरीज टायफाइड के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर मरीज बच्चे हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. राम चंद्र सोनी ने बताया कि बारिश के दिनों में पानी और भोजन की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। टायफाइड दूषित पानी या ठीक से न पके भोजन के सेवन से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, दस्त या कब्ज, भूख कम लगना और शरीर में दर्द शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
डॉ. सोनी ने लोगों को सलाह दी कि बरसात के दिनों में सड़क किनारे या खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें। पानी को हमेशा उबालकर या फिल्टर कर ही पिएं। सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही सेवन करें। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए उन्हें विशेष सावधानी की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बुखार लगातार बना रहे या पाचन संबंधी परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें और जांच कराएं। समय पर इलाज से टायफाइड पूरी तरह ठीक हो सकता है। बारिश के इस मौसम में सावधानी ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।