हिंडनबर्ग मामले में अदाणी समूह को भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) की क्लीन चिट मिलने के एक दिन बाद, कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि घोटाले के सभी परतों की जांच की आवश्यकता है क्योंकि यह बाजार नियामक की जांच की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने 1 बयान में कहा कि सुनियोजित हेडलाइन के विपरित, मोदानी एंटरप्राइजेज में वाणिज्यिक साझेदार को उच्चतम न्यायालय द्वारा अनिवार्य जांच के तहत जांच किए जा रहे 20 मामलों में से केवल 2 मामलों में अभी सेबी से क्लीन चिट मिली है। रमेश ने कहा कि मोदानी घोटाले के सभी परतों की जांच की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रश्नों की 1 श्रृंखला भी साझा की जिसे पार्टी ने हम अदाणी के हैं कौन (एचएएचके) में पूछे हैं तथा कहा कि ए अब तक अनुत्तरित हैं। कांग्रेस नेता ने उल्लेख किया कि शीर्ष अदालत ने 2 मार्च 2023 को सेबी को निर्देश दिया था कि वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद दो महीने के भीतर जांच पूरी करे। उन्होंने कहा, लेकिन बार-बार बढ़ाई गई समयसीमा और देरी के बाद सेबी का पहला आदेश आने में पूरे 2 साल 7 महीने लग गए। रमेश ने कहा, अब हम सेबी की उन शेष 22 मामलों पर रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें अदाणी समूह की कंपनियों में भेदिया कारोबार के आरोप, न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से संबंधित नियमों के उल्लंघन वे 13 संदिग्ध लेन-देन शामिल हैं, जिनकी जांच के बारे में सेबी ने 25 अगस्त 2023 को शीर्ष अदालत को बताया था।
इनमें अदाणी के करीबी सहयोगी नासिर अली शबान अहली और चांग चुंग-लिंग के विदेशों में सौदे शामिल हैं।उन्होंने कहा कि हालांकि मोदानी घोटाला सेबी की जांच की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री से पूछे गए एचएचके प्रश्नों की श्रृंखला में उठाए गए मुद्दों का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि इनमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करके कंपनियों पर अपनी परिसंपत्ति अदाणी समूह को बेचने का दबाव बनाया जाना भी शामिल है। रमेश ने यह आरोप भी लगाया कि गौतम अदाणी और उनके सात सहयोगियों द्वारा भारत में महंगे सौर ऊर्जा ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर 2,000 करोड़ रपए की रिश्वत योजना रची गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में मोदी सरकार ने लगभग एक साल से प्रधानमंत्री के सहयोगी को अमेरिकी एसईसी (प्रतिभूति और विनिमय आयोग) समन को तामील कराने से इनकार कर दिया।