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डिमेंशिया के बढ़ते मामलों पर तुरंत कदम उठाने की जरूरत : डॉ. कुणाल

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विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर यह जरूरी है कि अल्जाइमर डिसीज, जो डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, उसके प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए। इस वर्ष की थीम डिमेंशिया के बारे में पूछे समय पर निदान, उपचार और देखभाल की अहमियत को रेखांकित करती है। अल्जाइमर डिसीज मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करता है, लेकिन हर भूलने की समस्या अल्ज़ाइमर का संकेत नहीं होती। भूलने की आदत जीवन के हर चरण में हो सकती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ स्मृति क्षीण होना किसी गंभीर स्थिति का शुरुआती लक्षण हो सकता है। यह समझना ज़रूरी है कि बढ़ती उम्र में कमजोर होती कॉग्निटिव फंक्शन मेमोरी लॉस का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर अल्ज़ाइमर से जुड़ सकती है।

जोखिम को कम करने के लिए सक्रिय जीवनशैली अपनाना और मानसिक व शारीरिक रूप से सक्रिय बने रहना फायदेमंद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अल्जाइमर आज की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुका है। हर पांच सेकंड में एक नया अल्ज़ाइमर केस दुनिया में दर्ज होता है। वर्तमान में विश्वभर में चार करोड़ से अधिक लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं, जिनमें से लगभग 60 % मरीज 65 वर्ष से अधिक आयु के हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले 10 वर्षों में यह संख्या बढ़कर 8 करोड़ तक पहुँच सकती है। मैरिंगो एशिया अस्पताल, फरीदाबाद के न्यूरोलॉजी विभाग के क्लीनिकल डायरेक्टर, डॉ. कुणाल बहरानी ने बताया, अल्जाइमर को लेकर एक बड़ी गलतफ़हमी यह है कि कभी-कभी भूलना इसका साफ लक्षण है।

हकीकत में यह हमेशा गंभीर स्मृति समस्याओं या अल्जाइमर जैसी स्थिति तक नहीं ले जाता। शुरुआती लक्षण कई बार अन्य स्थितियों जैसे स्यूडो- डिमेंशिया, माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट या डिमेंशिया के अन्य रूपों की ओर भी संकेत कर सकते हैं। इसीलिए, विशेषकर 60 वर्ष से ऊपर के लोगों में स्मृति से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सभी स्मृति समस्याएं सीधे अल्ज़ाइमर से जुड़ी नहीं होतीं। थायरॉइड विकार, किडनी या लिवर की समस्या जैसी स्वास्थ्य स्थितियां स्मृति पर गहरा असर डाल सकती हैं। दवाओं के दुष्प्रभाव, विटामिन बी12 की कमी, नशा, मस्तिष्क संक्रमण या दिमाग में ब्लड क्लॉट भी मेमोरी लॉस और डिमेंशिया का कारण बन सकते हैं। इन कारणों की पहचान और उपचार के लिए व्यापक निदान आवश्यक है।

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