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15 दिन बाद मिली खाद, वह भी घंटों इंतजार के बाद

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जिले में किसानों को आखिरकार 15 दिन के लंबे इंतजार के बाद यूरिया और डीएपी खाद मिलना शुरू हुआ
है, लेकिन राहत मिलने के बावजूद भी किसानों को खाद केंद्रों पर लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा
है। किसानों का कहना है कि पिछले 10 से 15 दिनों से वे खाद केंद्रों के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन हर
बार यह कहकर लौटा दिया जाता था कि खाद उपलब्ध नहीं है। जब खाद मिलना शुरू हुआ, तब भी
किसानों को कई घंटे लाइन में खड़े रहकर इंतजार करना पड़ा।

फसलों की बुआई का सीजन पन्हेड़ा गांव से आए गंगाराम, मोहला गांव से आये जय कुमार, घरौंडा गांव से तारा चंद ने बताया कि हर साल इस समय फसलों की बुआई का सीजन होता है, ऐसे में समय पर खाद न मिलने से उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई किसानों ने कहा कि सरकार को इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। किसानों ने यह भी बताया कि जितनी जरूरत होती है, उतनी खाद नहीं मिलती अक्सर 2 से 3 कट्टे कम ही दिए जाते हैं। इस वजह से उन्हें अपनी फसल की बुआई में देरी करनी पड़ती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है। जिन किसानों का पहले से रजिस्ट्रेशन, उन्हें मिली खाद वहीं कृभको खाद केंद्र के सेल्समेन नरेंद्र शर्मा ने बताया कि बुधवार शाम को ही यूरिया और डीएपी खाद की खेप केंद्र पर पहुंची थी और गुरुवार सुबह से किसानों को वितरण शुरू कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि खाद उन्हीं किसानों को दी जा रही है जिनका रजिस्ट्रेशन पहले से हुआ है। सरकार की ओर से जो रेट तय किया गया है, उसी फिक्स रेट पर खाद दी जा रही है। किसी भी तरह की कोई मनमानी या अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जा रहा है। गौतरतलब है कि जिले में किसानों को पिछले 15 दिनों से डीएपी और यूरिया खाद सही तरीके से नहीं मिल पा रही थी। किसानों का कहना था कि खाद न मिलने से उनकी फसल बोने में देरी हो रही है और उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। किसान रोजाना खाद लेने आ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता था। उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से खाद केंद्र से उन्हें 2 दिन बाद आना कहकर लौटा दिया जाता था। किसानों का कहना है कि यह समस्या हर साल होती है, कभी डीएपी नहीं मिलता, तो कभी यूरिया। सरकारी केंद्रों पर एक कट्टा खाद 1300 में मिलता है, जबकि प्राइवेट दुकानों पर वही खाद 2000 तक में बेचा जा रहा है, जिससे खरीदना मुश्किल हो जाता है। किसानों ने कहा कि उन्होंने अपनी फसल का रजिस्ट्रेशन भी कर रखा है, फिर भी उन्हें खाद नहीं मिली थी।

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