तनाव के कारण छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बीच एक संसदीय समिति ने प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की सहायता के लिए कोचिंग सेंटर के प्रसार और इससे उत्पन्न होने वाले सामाजिक मुद्दों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थाई समिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रभाव और शिक्षा एवं विद्यार्थियों को इस उभरती प्रौद्योगिकी से लाभ की भी समीक्षा करेगी। हाल में लोकसभा के एक बुलेटिन के अनुसार, स्थाई समिति ने 2025-26 के दौरान पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम-श्री) की समीक्षा का भी निर्णय लिया है।
बुलेटिन में कहा गया है कि समिति प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों की सहायता के लिए कोचिंग सेंटर के प्रसार, इससे उत्पन्न होने वाले सामाजिक मुद्दों और इस मामले पर मौजूदा कानून की समीक्षा करेगी। पिछले कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों में दाख़िला लेने वाले छात्रों द्वारा पढ़ाई के दबाव के कारण आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं। केवल राजस्थान के कोटा शहर में ही ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसे भारत की कोचिंग राजधानी कहा जाता है। शिक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष की शुरुआत में 9 सदस्ईय समिति गठित की थी ताकि कोचिंग से जुड़े मुद्दों और डमी स्कूलों के उभरने की प्रवृत्ति के साथ-साथ प्रवेश परीक्षाओं की प्रभावशीलता और निष्पक्षता की भी जांच की जा सके।
समिति स्कूल शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं की प्रभावशीलता और निष्पक्षता तथा कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव का अध्ययन कर रही है। लोकसभा सचिवालय के अनुसार, समिति राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के कामकाज और प्रदर्शन की भी समीक्षा करेगी। साथ ही भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों की शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी जांच करेगी। समिति भारतीय उच्च शिक्षा परिषद (एचईसीआई) बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय के प्रयासों के संबंध में भी जानकारी मांगेगी। यूजीसी जैसी संस्थाओं की जगह लेने वाले एक उच्च शिक्षा नियामक की स्थापना के लिए एक विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना निर्धारित है। संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होगा।