
पर्यावरणीय संकट गहराया, डीडीए और दिल्ली सरकार से 4 हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट की मांग
दिल्ली की यमुना नदी के किनारे बसा बाढ़ क्षेत्र एक बार फिर पर्यावरणीय संकट और सरकारी उदासीनता के कारण सुर्खियों में है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर कहा है कि अवैध निर्माणों की जानकारी के साथ विस्तृत रिपोर्ट चार सप्ताह में प्रस्तुत की जाए।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामाजिक संगठनों ने यमुना किनारे चल रहे फार्म हाउस, शादी-ब्याह के लिए बने बेंक्वेट हॉल और कंक्रीट निर्माणों को लेकर कई बार आवाज़ उठाई है। उनका कहना है कि ये निर्माण न केवल नदी की मूल धारा में बाधा बन रहे हैं, बल्कि भूजल स्तर, जैव विविधता और प्रदूषण नियंत्रण को भी प्रभावित कर रहे हैं।
यमुना जीये अभियान के संयोजक मनोज मिश्रा ने कहा, “प्रशासन जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है। सर्वोच्च न्यायालय और NGT दोनों के आदेश के बावजूद यहां निर्माण होते रहे। यह साफ दर्शाता है कि राजनीतिक और आर्थिक ताकतें इन अतिक्रमणों के पीछे हैं।”
NGT ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि समय पर जवाब नहीं दिया गया या दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई तय होगी। इसके साथ ही राजस्व विभाग को उपग्रह चित्रों के माध्यम से पिछले 5 वर्षों में हुए बदलावों की तुलना करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यमुना की मौजूदा स्थिति को सुधारा नहीं गया, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली को बाढ़, जल संकट और वायु प्रदूषण जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।