
कोर्ट ने कहा, “सिर्फ इमारत गिराना काफी नहीं, जिम्मेदार अफसरों की भी हो जवाबदेही”
सुपरटेक ट्विन टावर के अवैध निर्माण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा अथॉरिटी को फटकार लगाई। न्यायालय ने पूछा कि इतने विशालकाय निर्माण के लिए अनुमति कैसे मिली, और क्या ये सब बिना प्रशासन की मिलीभगत के संभव था?
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “ऐसे निर्माण केवल बिल्डर की गलती नहीं होते, यह एक व्यवस्थागत विफलता है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों को भी कटघरे में लाया जाए।”
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाए ताकि शहरी नियोजन में पारदर्शिता आ सके और भविष्य में ऐसे मामले दोहराए न जाएं।
इस केस में नोएडा अथॉरिटी ने अपनी रिपोर्ट में माना कि ‘आंतरिक निरीक्षण की कमी’ के कारण यह निर्माण हो पाया। लेकिन अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज के निवासियों, जिन्होंने एक दशक तक इस अवैध निर्माण के खिलाफ लड़ाई लड़ी, ने कोर्ट की इस सख्ती का स्वागत किया है। निवासी सौरभ त्यागी ने कहा, “इंसाफ मिला, पर अब दोषियों को सज़ा मिलना ज़रूरी है।”
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सितंबर में रखी है जिसमें अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।