
स्टार्टअप्स और MNCs में छंटनी का दौर जारी, हजारों कर्मचारी असमंजस में
गुरुग्राम, जिसे ‘भारत की साइबर सिटी’ कहा जाता है, वहां का आईटी सेक्टर इन दिनों गंभीर आर्थिक मंदी से गुजर रहा है। विशेष रूप से स्टार्टअप्स और मिड-लेवल IT कंपनियों में छंटनी की लहर ने हजारों पेशेवरों को प्रभावित किया है।
ग्लोबल फाइनेंशियल अनिश्चितता, निवेश में गिरावट, और AI-ऑटोमेशन की तेज़ी से वजह से कई कंपनियां अपनी टीमों का आकार घटा रही हैं। साल 2025 की पहली तिमाही में ही गुरुग्राम की लगभग 40 से अधिक कंपनियों ने मिलकर 8,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया।
एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले राहुल माथुर ने कहा, “हमें एक दिन अचानक HR का मेल मिला और उसी दिन लैपटॉप वापस जमा करवाने को कहा गया। न तो कोई वॉर्निंग मिली, न ही किसी प्रकार का सपोर्ट।”
HR विश्लेषक रीमा बिष्ट बताती हैं कि, “कई कंपनियां लागत कम करने के लिए फ्रेशर्स को प्राथमिकता दे रही हैं और सीनियर स्तर के कर्मचारियों को निकाल रही हैं। कुछ विदेशी कंपनियां अब भारत से ऑपरेशन हटाकर फिलीपींस और वियतनाम की ओर शिफ्ट हो रही हैं।”
इस बीच हरियाणा सरकार ने एक ‘नवीन रोजगार नीति’ पर काम शुरू किया है जिसमें IT सेक्टर के लिए विशेष राहत पैकेज और पुनः कौशल प्रशिक्षण (reskilling) का प्रस्ताव है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति अस्थायी है। टेक सेक्टर का चक्र ऐसा है कि मंदी के बाद तेजी जरूर आती है, लेकिन तब तक युवाओं के लिए नौकरी पाना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना चुनौती बन चुका है।