राज्यसभा में मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को कई वाहन टकराने से 13 लोगों की मौत होने का मामला उठा तथा इस बात पर चिंता जताई गई कि दुर्घटनास्थल पर एक घंटे बाद एम्बुलेंस पहुंची। उच्च सदन में बुधवार को कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछते हुए यह मुद्दा उठाया और सरकार से जानना चाहा कि सरकार की सड़क सुरक्षा के बारे में क्या नीति है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने इसके जवाब में कहा कि वह इस मामले में सदस्य की भावना से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि भारत में प्रति वर्ष पांच लाख दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें करीब एक लाख 80 हजार मौतें होती हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के हादसों में मरने वाले 64 प्रतिशत व्यक्ति 18 से 34 वर्ष की आयु के लोग होते हैं। उन्होंने कहा कि यह इतनी भयानक बात है कि दंगे और लड़ाई में भी इतने लोग नहीं मरते। गडकरी ने कहा कि सरकार ने इसे रोकने के लिए कई उपाय किए लेकिन अधिक सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या मानवीय व्यवहार है।
उन्होंने कहा कि सड़क हादसों में दुर्घटनास्थल तक 10 मिनट में एम्बुलेंस पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्घटनाग्रस्त लोगों को जो भी व्यक्ति अस्पताल लेकर जाएंगे उसे सरकार राहवीर घोषित करेगी और 25 हजार रूपए का पुरस्कार देगी। साथ ही जिस अस्पताल में वह ले जाया जाएगा, उसे न्यूनतम 7 दिन का खर्चा डेढ़ लाख रूपए दिया जाएगा। परिवहन मंत्री ने कहा कि केंद्र ने अब राज्यों से कहा कि वह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के साथ प्रति किलोमीटर के आधार पर एक समझौता करें। इस समझौते के अनुसार, राज्यों को एम्बुलेंस दी जाएंगी जो केंद्र द्वारा तय शर्तों के तहत संचालित होंगी। इसमें यह भी शर्त होगी कि दुर्घटना के बाद 10 मिनट के भीतर एंबुलेंस मौके पर पहुंचनी चाहिए। मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के कई बसों व 3 अन्य गाड़ियों के आपस में टकराने के बाद कई वाहनों में लगी आग में झुलसने से 13 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में करीब 95 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।