
सरकार ने बनाई उच्च स्तरीय समिति, विपक्ष ने कहा – संघीय ढांचे पर हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ‘एक देश, एक चुनाव’ की वकालत करते हुए देशव्यापी बहस को हवा दे दी है। उनके बयान के तुरंत बाद सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जो इस विषय पर 6 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
केंद्र सरकार का दावा है कि इससे प्रशासनिक खर्चों में कटौती होगी, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और नीति निर्माण में गति मिलेगी। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि यह देश के संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों के खिलाफ है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “यह संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ है। इससे राज्यों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।” टीएमसी, डीएमके, राजद, सपा और आप ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
इस मुद्दे पर चुनाव आयोग का भी पक्ष महत्वपूर्ण है। आयोग ने तकनीकी स्तर पर सहमति जताई है लेकिन कानूनी और संवैधानिक बाधाओं का जिक्र किया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल लागू होता है तो इससे राष्ट्रीय दलों को फायदा और क्षेत्रीय दलों को नुकसान हो सकता है।