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साल के 191 दिन बेईमान रहा AQI, केवल 174 दिन वायु गुणवत्ता मॉनिटर हुई

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस बार फरीदाबाद की हवा एनसीआर के दूसरे जिलों की तुलना में साफ रही। वजह, इस बार जनवरी से लेकर 16 दिसंबर तक केवल 174 दिन का एयर क्वालिटी इंडेक्स जारी किया गया। दरअसल, शहर की वायु गुणवत्ता मापने वाली मशीनें साल के 191 दिन चलीं ही नहीं या उन्होंने पूरी तरह से वायु गुणवत्ता की रीडिंग नहीं की। खास बात यह रही कि बचे हुए इन 174 दिनों में एक बार भी औद्योगिक नगरी की हवा खराब या बहुत खराब श्रेणी में नहीं पहुंची। आंकड़ों के अनुसार इन 174 दिन में फरीदाबाद की हवा 36 दिन संतोषजनक श्रेणी में, 85 दिन मध्यम श्रेणी में और 53 दिन खराब श्रेणी में रहा। हालांकि नवंबर व दिसंबर महीने में आसमान में कई बार स्मॉग दिखाई दिया और आसपास के शहरों का AQI बहुत खराब व गंभीर श्रेणी में भी पहुंचा। ऐसे में फरीदाबाद के आंकड़ों पर सवालियां निशान रहे। इस साल प्रशासन की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कुछ इंतजाम किए गए, लेकिन इंतजाम देरी से हुए और जो इंतजार हुए वह नाकाफी रहे।

यह हैं प्रदूषण के मुख्य पांच कारण 4 धूल व टूटी सड़कें फरीदाबाद की अधिकतर सड़कों पर धूल रहती है, जो वाहनों के साथ उड़ती है और हवा को दूषित करती है। सेक्टरों व कॉलोनियों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकतर सड़कों की सेंट्रल वर्ज के साथ और सड़कों के किनारे धूल देखी जा सकती है। इसकी नियमित सफाई नहीं होती और लगातार धूल सड़कों पर बनी रहती है। इसके साथ ही शहर की काफी सड़कें टूटी हुई हैं। सड़कों पर गड्ढे होने से उसमें धूल इकठ्ठा रहती है, जो वाहनों के साथ उड़ती है। 4 ट्रैफिक जाम फरीदाबाद की सड़कों पर वाहनों की संख्या काफी अधिक है। इसके साथ ही काफी जगहों पर जाम की स्थिति रहती है, जहां काफी समय तक गाड़ियां बंद हुए बिना ही खड़ी रहती हैं। यह भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। नैशनल हाईवे के अधिकतर चौराहों के साथ शहर के सभी रेलवे ओवरब्रिज व अंडरपास जाम की चपेट में रहते हैं। इसके साथ ही NIT, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद व शहर के सेक्टर एरिया में भी कई सड़कें ऐसी हैं, जहां जाम की स्थिति रहती है।

4 कूड़े में आग शहर में कूड़े में आग लगाना प्रतिबंधित है। नगर निगम कूड़े के आग लगाने वाले लोगों का चालान करता है, लेकिन इसके बाद भी कूड़े में आग लगाने की घटनाएं रुकती नहीं हैं। रोजाना अलग – अलग 15 से 20 जगहों पर कूड़े के आग लगाने की घटनाएं सामने आती हैं। कुछ जगह को आग लंबे समय तक लगी रहती है और काफी धुआं वातावरण में फैल जाता है। यह भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है।
4 इंडस्ट्री से निकलने वाला धुंआ फरीदाबाद के औद्योगिक शहर है, जिसमें 30 हजार से अधिक छोटे – बड़े उद्योग चलते हैं। इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। हालांकि इंडस्ट्री को सीएनजी से जोड़ा जा रहा है, लेकिन अभी काफी इंडस्ट्री इससे अछूती हैं। शहर में कुछ इंडस्ट्री ऐसी भी हैं, जो अवैध तरीके से स्क्रैप जलाने व प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल करती हैं। इससे प्रदूषण काफी अधिक बढ़ जाता है।

4 नियमों का सख्ती से पालन न होना फरीदाबाद में क्रेशर जोन में 160 से अधिक क्रेशर हैं, जिनमें 100 के करीब क्रेशर एक्टिव हैं। इसके साथ ही 50 से अधिक ईंट भट्टे हैं। यह सभी भी नियमों का गंभीरता से पालन नहीं करते। ग्रैप की पाबंदियों के बाद भी कई जगहों पर ईंट भट्टे व क्रेशर जोन चलते रहते हैं। इसके साथ ही हॉट मिक्स प्लांट भी नियमों का पालन नहीं करते। कंस्ट्रक्शन व तोड़फोड़ संबंधित नियमों का भी गंभीरता से पालन नहीं होता। निर्माण सामग्री खुले में बिना ढके पड़ रहती हैं। कंस्ट्रक्शन साइट पर बिना प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम किए काम होता रहता है। 4 पूरे साल नहीं हुई प्रदूषण की मॉनिटरिंग फरीदाबाद में इस साल प्रदूषण की सही से मॉनिटरिंग भी नहीं हो पाई। AQI की मॉनिटरिंग के लिए फरीदाबाद में 5 मशीनें लगी हुई हैं। मार्च महीने में इन मशीनों को ऑपरेट करने वाली कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, जिसके चलते अप्रैल महीने में मशीनें बंद हो गई। उसके बाद सितंबर महीने के अंत में यह मशीने शुरू हुई। ऐसे में 6 महीने प्रदूषण के स्तर की मॉनिटरिंग ही नहीं हो गई। इस साल जनवरी महीने से 16 दिसंबर तक केवल 174 दिन ही प्रदूषण की मॉनिटरिंग हो पाई। इसमें सभी 5 मशीनें कभी काम करती नजर नहीं आई। कभी 2, तो कभी 3 मशीनों का ही डाटा जारी होता रहा है। इससे पूरे शहर का सही AQI का डाटा नहीं मिल पाया है।

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