नगर निगम यमुनानगर की मेयर सुमन बहमनी ने कहा है कि शिक्षा ही उन्नति का दरवाजा है। शिक्षा के बलबूते पर ही कोई मुकाम हासिल किया जा सकता है। सावित्री बाई फुले नारी जाति की उत्थान की नींव है। जिन्होंने कष्ट सहकर लड़कियों की शिक्षा की शुरूआत की थी। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अनेक कष्ट झेले और महिलाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।
वे सदैव अमर रहेंगी। हम सब का दायित्व है कि हम माता सावित्री बाई फुले द्वारा शुरू किए गए मिशन को आगे बढाएं। वे शनिवार को सेक्टर 8 स्थित अंबेडकर भवन में माता सावित्री बाई फुले की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि माता सावित्री बाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षक थी। माता सावित्री बाई फुले भारतीय सामाजिक क्रांति की वह अमर ज्योति है जिन्होंने अज्ञान, जातिवाद और पितृ सत्ता के घोर अंधकार में शिक्षा का दीप प्रज्ज्वलित किया। वे भारत की पहली महिला शिक्षक होने के साथ साथ महान समाज सुधारक, कवियित्री और नारी मुक्ति आंदोलन की अग्रणी योद्धा थी।
अंबेडकर भवन के प्रधान डॉ रामभक्त लांग्यान ने मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि माता सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के एक साधारण किसान परिवार में हुआ। बाल्या अवस्था में ही उनका विवाह महात्मा ज्योतिबा फुले से हुआ। उस समय समाज में स्त्रियों की शिक्षा वर्जित थी, किंतु ज्योराव फुले ने स्वयं उन्हें पढना लिखना सिखाया। इस प्रकार सावित्री बाई फुले ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी भूमिका की नींव रखी। कार्यक्रम में रिटायर जिला शिक्षा अधिकारी संतोष ग्रोवर, डॉ सुनीता सरोहा व डॉ पूनम बागी ने भी अपने विचार रखे। इससे पूर्व मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों ने माता सावित्री बाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अंबेडकर भवन की ओर से डॉ रामभक्त लांग्यान व अन्य पदाधिकारियों ने मुख्यातिथि व अन्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।