नगर परिषद के लिए शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त न करा पाना सिरदर्द बन गया है। परिषद को शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़कर गौशाला में छोड़ने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहा, जिससे योजना अधर में लटकी हुई है। परिषद अब तक 14 बार ठेका छोड़ने के लिए टेंडर जारी कर चुकी है।
एक ओर प्रदेश सरकार की तरफ से शहर को गंदगी मुक्त बनाने और बेसहारा पशुओं से छुटकारा दिलाने को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इस संबंध में बार-बार पत्राचार हो रहा है और उच्चस्तरीय बैठकों में अधिकारियों से जवाब भी मांगा जा रहा है। बावजूद इसके परिषद अधिकारियों के लिए योजना को अमलीजामा पहनाना मुश्किल बना हुआ है, क्योंकि शहर में घूम रहे करीब 250 बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए कोई एजेंसी आगे नहीं आ रही। पिछले करीब 2 वर्षों में परिषद 14 बार टेंडर लगा चुकी है। एक बार एजेंसी मिली भी थी, लेकिन बेसहारा पशुओं को पकड़ने के दौरान पशु मालिकों द्वारा एजेंसी कर्मियों की पिटाई कर दी गई, जिसके बाद ठेका रद्द कर दिया गया। हाल ही में 14वीं बार टेंडर लगाया गया, लेकिन इस बार भी कोई एजेंसी आगे नहीं आई। इससे नगर परिषद के लिए शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्त कराना चुनौती बना हुआ है।
बेसहारा पशुओं का बढ़ता आतंक
शहर में बेसहारा पशुओं पर नियंत्रण न होने के कारण इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। हर महीने करीब 5 से 6 पशुओं की बढ़ोतरी हो रही है और वर्तमान में इनकी संख्या 300 के करीब पहुंच गई है। सबसे ज्यादा समस्या अनाज मंडी परिसर में देखी जा रही है, जहां खराब सब्जियां मिलने से पशुओं को भरपूर चारा मिल जाता है। इसके अलावा शहर में बने अस्थायी कूड़ा केंद्रों के आसपास भी बड़ी संख्या में पशु नजर आते हैं, जो पॉलीथीन और कचरा खाकर पेट भरते हैं।
वर्जन:
शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए कोई एजेंसी आगे नहीं आ रही है, जिसके कारण शहर को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की योजना सफल नहीं हो पा रही है। (सुनील कुमार रंगा-कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोहना)