जगाधरी, हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसके दौरान परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी वंशिका भारती ने एक शिष्य के जीवन में गुरु दर्शन का महत्व समझाते हुए कहा कि दर्शन केवल आँखों से देखना नहीं होता अपितु साकार स्वरूप में प्रकट हुई दिव्यता को अपनी आत्मानुभूति के द्वारा रोम रोम में उतार लेना ही वास्तविक दर्शन है। आगे साध्वी ने बड़े ही सुंदर शब्दों में विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि आज हम कई तीर्थस्थानों में जाते हैं जहाँ हम प्रभु के विग्रह, संत महात्माओं एवं भक्तों के दर्शन करते हैं किन्तु विचार करें कि उन दर्शनों के द्वारा हमें कितना आध्यात्मिक लाभ हो रहा है क्योंकि पानी पीने से जैसे प्यास तत्काल ही मिट जाती है ठीक इसी प्रकार दर्शन करने मात्र से ही हमारी आत्मा में परमानंद की अनुभूति होती है।

निराकार स्वरूप परमात्मा जब साकार स्वरूप धारण करके धरती पर अवतरित होता है तो उसका आभा मंडल अति दिव्य एवं प्रभावशाली तरंगों से ओत प्रोत होता है और उनकी उपस्थिति साधारण नहीं होती। तभी भक्तों को अनुभव होता है कि उनके दर्शन के पश्चात मन की नकारात्मकता एवं दुविधा का तत्काल ही अंत हो जाता है। ऐसे पावन दर्शन से ही मन में सकारात्मक भाव पैदा होते हैं और जीवन सहज ही सन्मार्ग पर आ जाता है। महात्मा बुद्ध का एक बार दर्शन करने से ही अंगुलिमाल डाकू के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन घटित हो गया। एक साधारण मनुष्य अपनी दृष्टि से किसी को प्रभावित अवश्य कर सकता है किन्तु परिवर्तित करने की क्षमता तो केवल उसकी दृष्टि में होती है जो इस ब्रह्मांड का नियंता है। एक ब्रह्मनिष्ठ संत ऐसी ही दिव्य विभूती हैं जिनकी उपस्थिति में एक साधारण मनुष्य के भीतर चाहकर भी नकारात्मक विचार नहीं आ सकते क्योंकि उनकी दृष्टि परम पावन एवं दिव्यता से ओतप्रोत होती है। ऐसी वात्सल्य एवं करूणा से परिपूर्ण एक दृष्टि ही किसी के संपूर्ण जीवन को बदल देने के लिए पर्याप्त है इसीलिए गुरु दर्शन का अति महत्त्व है। संपूर्ण जीवन के तप और साधना से जो प्राप्त नहीं किया जा सकता वह ऐसे परम गुरु के क्षण भर के दर्शन से ही प्राप्त हो सकता है बशर्ते वह दर्शन केवल आँखों से नहीं अपितु अंतर आत्मा से किया जाए। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन किया। सामूहिक ध्यान साधना एवं विश्व शांति की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।