दिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने फैसले को “सत्य की जीत” बताया और कहा कि उनके खिलाफ पूरा मामला राजनीतिक साजिश के तहत गढ़ा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मिलकर आम आदमी पार्टी को खत्म करने की कोशिश की। राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल के साथ-साथ मनीष सिसोदिया को भी आरोपों से मुक्त करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और पर्याप्त सबूत नहीं थे। कोर्ट ने साफ किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

फैसले के बाद केजरीवाल ने कहा कि उन्हें महीनों तक जेल में रखा गया और उनकी छवि खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन अंततः सच सामने आ गया। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं पर झूठे केस करना देशहित में नहीं है। इस मामले में सबसे पहले आबकारी विभाग के पूर्व अधिकारी को राहत मिली, जिसके बाद सिसोदिया और फिर केजरीवाल को भी क्लीन चिट दी गई। अदालत ने जांच एजेंसी सीबीआई की चार्जशीट में कई खामियां बताईं और सबूतों को कमजोर माना। हालांकि सीबीआई ने फैसले से असहमति जताते हुए संकेत दिया है कि वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है। यह पूरा मामला 2022-23 की दिल्ली एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा था, जिसमें बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी जोड़े गए थे और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं को जांच का सामना करना पड़ा।