बरसाती नाले में सोसाइटियों द्वारा छोड़ा जा रहा सीवरेज का गंदा पानी जानलेवा बीमारियों को न्योता दे रहा है। नाले के आसपास बस रही कॉलोनियों के लोग बुखार, खांसी और मलेरिया जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। दमदमा झील से आने वाले बरसाती पानी के नाले में अवैध रूप से सोसाइटियों का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। नगर परिषद सीमा क्षेत्र में आने वाली सेंट्रल पार्क, जीएलएस और एमवीएन सोसाइटी से एसटीपी का गंदा पानी बरसाती नाले में डाला जा रहा है। एमवीएन सोसाइटी से टैंकरों के माध्यम से गंदा पानी गिराया जा रहा है, जबकि जीएलएस और सेंट्रल पार्क से पाइपलाइन के जरिए सीवर का पानी नाले में छोड़ा जा रहा है। नाले में सीवरेज का गंदा पानी तीन से चार फुट तक जमा है। लाखूवास के निकट नाले को बंद किए जाने से जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
बीमारी फैलने की आशंका:
बरसाती नाले में सीवरेज के पानी का स्तर बढ़ने से आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों में जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बालूदा मार्ग निवासी सतीश का कहना है कि मिट्टी भराव के दौरान वाहनों की आवाजाही के उद्देश्य से नाले को बंद कर दिया गया, जिससे सीवरेज का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नाले में जमा गंदे पानी से उठ रही बदबू के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया है और लोगों में बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ रही है। राकेश का कहना है कि गंदा पानी जमा होने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मच्छरों के काटने से लोग बुखार, जुकाम, खांसी और अन्य बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं।
परिषद पर समाधान न करने का आरोप
सोसाइटीवासी स्वयं भी बरसाती नाले में सीवरेज का गंदा पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं। पंकज कुमार का कहना है कि नाले से उठने वाली दुर्गंध हवा के साथ आसपास के घरों तक पहुंच रही है, जिससे सांस लेना कठिन हो गया है और सिरदर्द की समस्या बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद को कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद अवैध रूप से छोड़े जा रहे सीवरेज के पानी पर रोक नहीं लगाई गई है।
वर्जन:
वहीं संबंधित अधिकारियों का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं था। होली का पर्व समाप्त होने के बाद इस समस्या पर गंभीरता से विचार कर कानूनी स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। (सुनील कुमार रंगा-कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोहना)