Middle east में पिछले 3 दिनों से जारी युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। भारत में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 15% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। वहीं ब्रेंट क्रूड लगातार दूसरे दिन 80 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर चुका है।
आखिर कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
ईरान और इज़राइल के बीच हो रहे युद्ध के कारण लाल सागर और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं। इसके चलते तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कई देशों तक समय पर सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है। सप्लाई में रुकावट आने से तेल की कीमतों में 10% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 40–45% मध्य-पूर्व के देशों से आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि युद्ध की स्थिति लंबी चली तो भारत का “ऑयल इंपोर्ट बिल” लाखों करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। परिवहन महंगा होने से फल और सब्जियों सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ सकते हैं।