रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को हराकर आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। 2007 और 2024 के बाद यह तीसरा मौका है जब भारतीय टीम इस फॉर्मेट की विश्व चैंपियन बनी है। टीम इंडिया की यह जीत किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। टाइटल डिफेंड करने उतरी भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत बेहद दमदार अंदाज में की, लेकिन बीच में आई एक हार ने पूरे अभियान को संकट में डाल दिया। इसके बाद टीम ने शानदार वापसी करते हुए इतिहास रच दिया।
टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया और अपने चारों मैच जीतकर दबदबा कायम रखा। इन मुकाबलों में पाकिस्तान के खिलाफ भी एकतरफा जीत शामिल रही, जिसके साथ टीम इंडिया ने सुपर-8 के लिए क्वालिफाई किया। हालांकि लगातार जीत के बावजूद भारतीय टीम की कुछ कमजोरियां भी सामने आईं, खासकर बल्लेबाजी को लेकर सवाल उठने लगे थे। सुपर-8 में टीम इंडिया का पहला मुकाबला साउथ अफ्रीका से हुआ। अहमदाबाद के इसी मैदान पर खेले गए इस मैच में भारत को 76 रनों की करारी हार झेलनी पड़ी। इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और टीम बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रही। इस हार के बाद ऐसा लगने लगा कि टीम इंडिया का टूर्नामेंट में सफर यहीं खत्म हो सकता है, क्योंकि इस हार से नेट रन रेट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था।
सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए भारत को अपने बाकी दोनों मुकाबले बड़े अंतर से जीतने के साथ-साथ अन्य टीमों के परिणामों पर भी नजर रखनी थी। हालांकि इस हार ने भारतीय टीम को अपनी रणनीति, टीम संयोजन और गेम प्लान पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने अहम फैसले लेते हुए प्लेइंग इलेवन में बदलाव किए। संजू सैमसन को बतौर ओपनर मौका दिया गया,जबकि ईशान किशन को नंबर-3 पर बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। तिलक वर्मा के बल्लेबाजी क्रम में भी बदलाव किया गया, जिसका टीम को बड़ा फायदा मिला। इन बदलावों के बाद भारतीय बल्लेबाजी में नई ऊर्जा देखने को मिली और विरोधी टीमों पर दबाव बढ़ने लगा। इसके बाद चाहे वेस्टइंडीज हो, इंग्लैंड या फिर न्यूजीलैंड, टीम इंडिया ने हर मुकाबले में दमदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। साउथ अफ्रीका से मिली हार के बाद टीम के खिलाड़ियों के माइंडसेट में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। बल्लेबाजों ने अपनी तकनीक और रणनीति में सुधार किया। तिलक वर्मा और निचले क्रम के बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी निभाई, जबकि ओपनर्स ने टीम को मजबूत और संतुलित शुरुआत दिलाई।