प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 सालों से वन्यजीव संरक्षण की नई गाथा लिखी जा रही है। बिग कैट प्रजाति के वन्यजीव हो या जलीय सभी के संरक्षण में मौजूदा समय में भारत वैश्विक नेतृत्व करता दिख रहा है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में देश ने विश्व शेर व हाथी दिवस मनाया। इससे पहले 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस मनाया गया था। भारत, जो अपने जैविक विविधता और समृद्ध वन्य परंपराओं के लिए विश्वविख्यात है, आज शेर और हाथी जैसे अद्वितीय वन्यजीवों के संरक्षण में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने न केवल बाघों के संरक्षण में ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किए हैं, बल्कि अब एशियाई शेर और हाथियों की सुरक्षा को भी एक राष्ट्रीय प्राथमिकता में बदल दिया है। आज भारत में एशियाई शेरों की संख्या 891 हो गई है जो 2020 में मात्र 674 थी। वहीं, एशियाई हाथियों की संख्या 30,000 से अधिक है, जो पूरी दुनिया की आबादी का लगभग 60 प्रतिशत है। यह आंकड़े महज़ संरक्षण की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि उस संवेदनशील और समर्पित शासन का प्रमाण हैं, जिसकी बागडोर प्रधानमंत्री मोदी के हाथों में है। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए श्री मोदी ने सासन गिर को शेरों के लिए सुरक्षित स्वर्ग बनाने की दिशा में कई पहल की थीं। जंगल की सीमा का संरक्षण, जल स्रोतों का पुनरुद्धार, आधुनिक निगरानी तंत्र और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे उपायों ने गिर में शेरों के पुनरुत्थान को संभव बनाया। यही दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट लायन के रूप में सामने आया, जिसका उद्देश्य शेरों के आवास विस्तार, स्वास्थ्य निगरानी और जनसंख्या वृद्धि को वैज्ञानिक तरीकों से सुनिश्चित करना है।
हाथियों के संदर्भ में, भारत सरकार का प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 से निरंतर सक्रिय है। इसके अंतर्गत देशभर में हाथियों के 150 प्राकृतिक गलियारों की पहचान की गई है, जिनमें से कई को पुनर्जीवित कर मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में ठोस कार्य किया गया है। 33 हाथी अभ्यारण्य है। गज यात्रा जैसे अभियान न केवल जागरूकता फैलाते हैं, बल्कि आम नागरिकों को संरक्षण की प्रक्रिया में सहभागी भी बनाते हैं। 3 मार्च 2025 को विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सासन में एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लिया। इस बैठक में शेर, हाथी और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे ज्वलंत विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि केवल निगरानी या सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व का भाव और स्थानीय सहभागिता ही दीर्घकालिक समाधान का मार्ग है। उन्होंने इस मौके पर कहा था कि लिए आइए हम अपने ग्रह की अद्भुत जैव विविधता की रक्षा और संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराएं। प्रत्येक प्रजाति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आइए, आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके भविष्य की रक्षा करें। हमें वन्य जीवों के संरक्षण और सुरक्षा में भारत के योगदान पर भी गर्व है। आज देश वन्यजीव संरक्षण की अमृत यात्रा कर रहा है। लोगों में भी जागरूकता बढ़ी है। कुछ साल पहले जब देश में कई दशकों बाद चीता का आगमन हुआ तो देशवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। आज प्रोजेक्ट चीता की सफलता चहुँओर हो रही है।
चीता का कुनबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट चीता को 17 सितंबर 2022 हुआ था। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। ड्रोन, कैमरा ट्रैप और थर्मल इमेजिंग के जरिए वन्यजीवों की वास्तविक समय निगरानी हो रही है। कई क्षेत्रों में स्मार्ट फेंसिंग और सौर बाड़ की स्थापना से वन्यजीवों की आवाजाही नियंत्रित की जा रही है। अवैध शिकार पर भी सरकार ने कठोर कार्रवाई की है। आज भारत न केवल अपनी सीमाओं के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वन्यजीव संरक्षण का नेतृत्व कर रहा है। बिग कैट एलायंस के तहत भारत ने कई देशों को साथ लेकर काम कर रहा है। यह शेर, बाघ, तेंदुआ और हिम तेंदुए जैसे प्रजातियों के लिए वैश्विक गठबंधन का स्वरूप ले रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत अब केवल एक देश नहीं, बल्कि एक संरक्षण संस्कृति का प्रतीक बन रहा है, जहाँ प्रकृति, परंपरा और प्रगति का अद्भुत समन्वय है। बिग कैट एलायंस, प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के अवसर पर 9 अप्रैल 2023 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुभारंभ किया गया था। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के सहयोग से,आईबीसीए ने वन्यजीव और संरक्षण चिकित्सकों के लिए क्षमता निर्माण पर एक कार्यकारी पाठ्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें 27 देशों के अधिकारियों को एक साथ लाया गया , जिससे वन्यजीव संरक्षण और सतत विकास के लिए साझा वैश्विक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।भारत सरकार ने एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण और सुरक्षा के लिए कई रणनीतिक पहलों को लागू किया है, जिससे उनकी जनसंख्या में वृद्धि और आवास संरक्षण में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। भारतीय एक सींग वाले गैंडे के लिए राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2019 में, इस रणनीति का उद्देश्य वैज्ञानिक और प्रशासनिक उपायों के माध्यम से मौजूदा संरक्षण प्रयासों को बढ़ाकर उन क्षेत्रों में गैंडों की आबादी को फिर से बढ़ाना है जहाँ वे पहले मौजूद थे। भारतीय राइनो विजन 2020, यह कार्यक्रम गैंडों की आबादी बढ़ाने और व्यक्तियों को उपयुक्त आवासों में स्थानांतरित करके उनके वितरण का विस्तार करने पर केंद्रित है , जिससे आनुवंशिक विविधता बढ़ेगी और स्थानीय खतरों का जोखिम कम होगा। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान , 2,613 बड़े एक सींग वाले गैंडोंका घर है , जो प्रभावी संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। असम की गैंडों की आबादी दुनिया के बड़े एक सींग वाले गैंडों का लगभग 68त्न है , जो वैश्विक संरक्षण में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। विश्व वन्यजीव दिवस पर कई महत्वपूर्ण घोषणा की गई थी। इस मौके पर भारत की पहली नदी डॉल्फन आकलन रिपोर्ट जारी की गई , जिसमें आठ राज्यों की 28 नदियों को शामिल किया गया। डॉल्फन संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। वन्यजीव स्वास्थ्य प्रबंधन में समन्वय बढ़ाने के लिए जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल केंद्र की आधारशिला रखी गई। मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) एसएसीओएन, कोयंबटूर में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की, उन्नत ट्रैकिंग प्रौद्योगिकी, निगरानी प्रणाली और एआई-संचालित घुसपैठ का पता लगाने वाली त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की तैनाती आदि प्रमुख है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता, परंपरा और अत्याधुनिक तकनीक के सम्मिश्रण वाली परिवर्तनकारी पहलों की श्रृंखला में परिलक्षित होती है। प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को मजबूत करने से लेकर घड़ियाल और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी प्रजातियों के लिए नए संरक्षण प्रयासों की शुरुआत करने तक, सरकार ने एक समग्र और विज्ञान-संचालित दृष्टिकोण अपनाया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक मानचित्रण और समुदाय-संचालित संरक्षण का एकीकरण जैव विविधता संरक्षण में भारत के वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करता है। लुप्तप्राय प्रजातियों का उल्लेखनीय पुनरुत्थान, मजबूत कानूनी ढाँचा और प्रौद्योगिकी का रणनीतिक एकीकरण, पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत सरकार के सक्रिय दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, बहुपक्षीय निकायों और संरक्षण साझेदारों के साथ भारत के सहयोग ने वैश्विक जैव विविधता चुनौतियों का समाधान करने में उसके नेतृत्व को सुदृढ़ किया है। विश्व शेर दिवस और विश्व हाथी दिवस हमें स्मरण कराते हैं। कि यह संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की चेतना का विषय है। शेरों की दहाड़ और हाथियों की पदचाप जब हमारी सांस्कृतिक ध्वनि बन जाए, तभी हम सच्चे अर्थों में जैव विविधता के संरक्षक बन सकेंगे।
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)

पंकज मिश्रा
केंद्रीय विदेश तथा पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री के वरिष्ठ मीडिया सलाहकार