Faridabad : प्रदेश की पहली आवासीय तीरंदाजी अकादमी बंद होने की कगार पर है। कोच के ट्रांसफर के बाद खिलाड़ियों का तेजी से रुझान कम हुआ है। अकादमी को 28 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उनका भी सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। प्रदेश सरकार ने 2 वर्ष पूर्व तीरंदाजी खिलाड़ियों को अभ्यास का बेहतर माहौल देने के लिए आवासीय खेल अकादमी शुरू की थी। इसके तहत प्रदेश में विभिन्न खेलों की 10 अकादमियां शुरू की गई थी।
इनमें से फरीदाबाद के जिला खेल विभाग को तीरंदाजी की आवासीय अकादमी दी गई थी ट्रायल के आधार पर प्रदेश के 25 बेहतरीन खिलाड़ियों का चयन कर कोच दीपक अहलावत द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा था और उनके रहने, खाने-पीने की सभी व्यवस्था प्रदेश सरकार की ओर से की गई थी। नई सरकार के बनने के बाद काफी फेरबदल हुए। तीरंदाजी कोच दीपक अहलावत का पलवल ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी अनुपस्थिति आवासीय अकादमी बंद हो गई।
ओलंपिक सहित अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने का सपना लेकर फरीदाबाद पहुंचे तीरंदाजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। सरकार के 28 लाख रुपये का सही उपयोग नहीं प्रदेश सरकार ने राज्य खेल परिसर में वालीबॉल के बराबर खाली पड़े मैदान तीरंदाजी अकादमी का मैदान तैयार किया था। इसके तहत मैदान को समतल किया गया था। तीरंदाजी के अलावा अन्य खिलाड़ियों को दुर्घटना ग्रस्त होने से बचाने के लिए चारों तरफ से टीन लगाई थी। ताकि तीर बाहर न जा सकें। इसके अलावा गेट भी लगाया गया था। अकादमी बंद होने और कोच के ट्रांसफर के बाद 28 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया तीरंदाजी मैदान अब बिल्कुल खराब हो गया है।
अकादमी को जाने वाले रास्ते पर एक पेड़ टूटा हुआ गिरा है। वहीं टारगेट बहुत ही दयनीय स्थिति हो गई है। अकादमी में अब नए खिलाड़ी अभ्यास के लिए नहीं आते, लेकिन अभी भी पुराने खिलाड़ी अभ्यास के लिए पहुंच जाते हैं। इन खिलाड़ियों के अभ्यास के दौरान अन्य लोग भी मैदान पर आवाजाही करते हैं। यह किसी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भी पड़ा असर कोच के ट्रांसफर के बाद से तीरंदाजी के उल्टे दिन शुरू हो गए। उसका परिणाम एसजीएफआई की राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में देखने को भी मिला। फरीदाबाद के खिलाड़ियों ने अंडर-14, 17 और 19 आयुवर्ग में मात्र तीन पदक ही जीतने सफल रहे। इससे पहले फरीदाबाद के तीरंदाजी ने इंडियन, रिकर्व और कंपाउंड तीन इवेंट की एकल एवं टीम प्रतिस्पर्धा में अच्छी संख्या में पदक जीतते थे। योजना भी अधर में लटकी सरकार ने आवासीय अकादमी बनाने के साथ ही तीरंदाजी की वर्ल्ड सुविधाएं खिलाड़ियों को उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की थी। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक टारगेट, दर्शक दीर्घा, शौचालय, चेंजिंग रूम, स्टोर रूम बनाए जाने थे। यह योजना भी अधर में लटक गई है।