दिल्ली में बीजेपी सरकार के एक साल पूरे होने पर आज मुख्यमंत्री अपनी कैबिनेट के साथ कामकाज का रिपोर्ट कार्ड जारी करेंगी। पहले वर्ष में आयुष्मान योजना, अटल कैंटीन, होली-दिवाली पर मुफ्त सिलिंडर और मास्टर ड्रेनेज प्लान जैसी घोषणाओं से सरकार ने सक्रियता दिखाई, लेकिन प्रदूषण, जलभराव, पेयजल संकट, सड़कों के गड्ढे और जाममुक्त दिल्ली जैसे मुद्दे अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
आयुष्मान योजना की शुरुआत, सीमित विस्तार:
शपथ के बाद पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान योजना लागू करने का फैसला लिया गया। हालांकि एक साल में करीब 150 अस्पताल ही इससे जुड़ पाए हैं। ई-व्हीकल पॉलिसी 2.0 अभी तक अमल में नहीं आ सकी। गड्ढामुक्त सड़कों के दावे के बीच लगभग 150 किलोमीटर सड़कों की मरम्मत की गई है, जबकि 400 किलोमीटर सड़कों के सुधार का लक्ष्य घोषित किया गया है।
महिला समृद्धि योजना:
महिला समृद्धि योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसे जमीन पर लागू नहीं किया गया। नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा भी फिलहाल लंबित है। सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार और उपराज्यपाल के बीच तालमेल बेहतर होने से प्रशासनिक कामकाज में तेजी आई है।
प्रशासनिक ढांचे में बदलाव:
जिलों की सीमाओं में बदलाव करते हुए संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है। जिला स्तर पर मिनी सचिवालय बनाने की योजना को मंजूरी और फंड स्वीकृत हो चुका है। केंद्र के साथ बेहतर समन्वय के चलते कई योजनाओं के लिए विशेष आर्थिक सहायता भी मिली है।
दिल्ली को प्रदूषण से राहत देने के लिए रेखा सरकार ने DEVI योजना शुरू की। इसके तहत 9 मीटर की छोटी बसें उन इलाकों में चलाई जा रही हैं जहां बड़ी बसें नहीं पहुंचतीं। इसके बावजूद वायु प्रदूषण की समस्या अभी कायम है। सरकार का कहना है कि यह चुनौती पिछली सरकारों से मिली है। दावा है कि ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।