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सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य’ को मौलिक अधिकार घोषित करना ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य – सुधा भारद्वाज

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माननीय सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय में ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य’ को मौलिक अधिकार घोषित करते हुए देशभर के सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुधा भारद्वाज ने कहा कि यह निर्णय किशोरियों के स्वास्थ्य, सम्मान और शिक्षा के अधिकार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र सरकार की ‘स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’ अथवा राष्ट्रीय नीति को प्रभावी रूप से लागू करने का भी स्पष्ट निर्देश दिया है।

सुधा भारद्वाज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला पूर्णतः स्वागतयोग्य है और इसके लिए न्यायालय का हार्दिक आभार व्यक्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस हाईकमान इस विषय पर शुरू से ही गंभीर और संवेदनशील रहे हैं। उनके दिशा-निर्देशों के अनुरूप पर्यावरणीय संतुलन और जीव-जंतुओं की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन के निर्माण की पहल की गई तथा महिला कांग्रेस के नेतृत्व में उनका वितरण भी किया गया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी,राहुल गांधी एवं अलका लांबा की दुरगामी सोच के अनुरूप ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया। उनकी यह दूरगामी सोच और इस मुद्दे पर गंभीरता काबिले तारीफ है।

उन्होंने आगे कहा कि अब यह सरकार और प्रशासन का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को अक्षरशः लागू करें। ग्रामीण एवं शहरी—दोनों क्षेत्रों के सभी स्कूलों में किशोरियों को निःशुल्क, सुरक्षित और बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही स्कूल परिसरों में छात्र-छात्राओं के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त शौचालयों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी छात्रा को मासिक धर्म के कारण शिक्षा से वंचित न होना पड़े

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