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वंदे भारत के निर्माता की पहली यात्रा: भोजन स्वच्छ पर यात्रियों की संख्या कम

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2019 में पहली वंदे भारत ट्रेन शुरू किए जाने के 7 साल बाद, देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन के उत्पादन का नेतृत्व करने वाले सुधांशु मणि को हाल ही में एक यात्री के रूप में इसमें यात्रा करने का अवसर मिला। लखनऊ के चारबाग स्टेशन से प्रयागराज के लिए ट्रेन में सवार हुए मणि ने अपने अनुभव को मिला-जुला बताया। उन्होंने ट्रेन के बाहरी रूप, एक्जीक्यूटिव क्लास में साफ-सफाई और स्वच्छ भोजन की सराहना की लेकिन साथ ही यात्रियों की कम संख्या और कोच के फर्श पर बिछे अनावश्यकै लाल कालीन पर भी आपत्ति जताई।

मणि ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, बाहरी रूप काफी हद तक वैसा ही दिखा जैसा हमने बनाया था। उन्होंने कहा कि एक्जीक्यूटिव क्लास का कोच उचित रूप से साफै था, हालांकि एक अनावश्यक लाल कालीन की पट्टी से वह निराश थे। सीटों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि वे प्रोटोटाइप से अधिक आरामदायक थीं। उन्होंने शौचालय को साफ और कार्यात्मकै बताया लेकिन कहा कि फिटिंग पर लागत कटौती और खरीद प्रणाली की खामियों की छाप स्पष्ट थी।

उन्होंने आंतरिक सज्जा को सुखदै और भोजन की गुणवत्ता को स्वच्छ और उचित रूप से स्वादिष्टै पाया।
हालांकि, कम यात्री संख्या ने उन्हें निराश किया। मणि ने कहा, सच कहूं तो यात्रियों की संख्या कम थी – एक्जीक्यूटिव क्लास में 25 % से कम और चेयर कार मुश्किल से आधी क्षमता पर थी। उन्होंने कहा, हमने बहुत पहले ही अनुमान लगा लिया था: चूंकि यह केवल डे-ट्रेन मॉडल (दिन के समय यात्रा का मॉडल) है, इसलिए स्लीपर संस्करण (वेरिएंट) के बिना यह उन मार्गों पर यात्री संख्या के लिए संघर्ष करने पर मजबूर होगी जहां प्रीमियम सुविधाओं के बावजूद ग्राहकों की संख्या कम है। वंदे भारत की अधिकतम गति 160 किमी प्रति घंटा होने के बावजूद इसे 130 किमी प्रति घंटा की गति से चलाए जाने पर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया। मणि ने 2018 में प्रोटोटाइप ट्रेन 18 (जिसे बाद में वंदे भारत नाम दिया गया) के परीक्षण के दौरान इसमें यात्रा की थी। वह 38 साल के करियर के बाद 31 दिसंबर 2018 को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई के महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

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