28 लाख की आबादी वाले जिले के एकमात्र सरकारी अस्पताल BK का प्रसूति वार्ड इतनी जर्जर हालत में है कि यहां आने वाली गर्भवती किसी अनहोनी की आशंका से प्रसव कराने में भी डर महसूस करती हैं। हालात ये है कि वार्ड की फाल्स सीलिंग से स्टील ब्रैकेट, इलेक्ट्रिक तारें, लाइटिंग आदि लटक रहे हैंं। मरीजों के लिए तो छोड़ दीजिए महिला स्टाफ के लिए भी शौचालय नहीं है। यह सारी व्यवस्था तब है जब पीएमओ से लेकर सीएमओ तक बीके अस्पताल में सारी व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा करते हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में आने वाली महिलाओं को स्वच्छता की सबसे ज्यादा जरुरत होती है, लेकिन लेबर रूम मेें उन्हें वे सुविधायें नही मिल रही हैं। अस्पताल के लेबर रूम के सटे स्नानागार और शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। शौचालय में सारे वॉश बेसिन टूटे पड़े हुए हैं। हालात ऐसे है कि महिलाऐं बाथरूम जाने में कतराती हैं। महिला मरीजों और उनके साथ मौजूद महिला तीमारदारों को बाथरूम जाने में बड़ी समस्या होती है। एक महिला कर्मचारी के अनुसार अधिकतर प्रसूताएं और अन्य महिलाएंं गंदगी से इन्फेक्शन होने के डर से शौचालय जाने से कतराती हैं।
एक तीमारदार महिला ने बताया कि शौचालय बेकार होने के कारण घंटों तक लघुशंका रोकने को मजबूर होना पड़ता है, इस गंभीर समस्या के प्रति किसी का ध्यान नहीं है। टूटे शौचालय की समस्या मरीजों की ही नही बल्कि वहां कार्यरत कर्मचारियों की भी है। शौचालय के बाहर खुले में लटक रही लाइटें हैं, मानो किसी अनहोनी को आमंत्रण दे रही हों। सीलिंग की मरम्मत का कार्य अूधरा पड़ा है जिससे वहां पर बिजली की तारे खुली लटक रही है। मरम्मत के लिए की गई तोड़फोड़ के बाद उसका मलबा भी जगह-जगह पड़ा है, जिससे वहां आने वाले लोगो को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध मेें सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा से जानकारी चाही गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।