प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को दिल्ली में आयोजित एक बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां राजधानी के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इस मौके पर उन्होंने 33,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर जनता को समर्पित किए, जिससे राजधानी के लाखों यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
उद्घाटन किए गए इन कॉरिडोरों में पिंक लाइन का मजलिस पार्क–मौजपुर सेक्शन और मैजेंटा लाइन का दीपाली चौक–मजलिस पार्क खंड शामिल हैं। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया और राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल सरकारी प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है।
प्रधानमंत्री ने टीएमसी सरकार के रवैये को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होता है और उसका सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संथाल समाज के एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन में भाग लेने के लिए पश्चिम बंगाल गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित सम्मान और सहयोग नहीं दिया गया और आयोजन को अव्यवस्था के भरोसे छोड़ दिया गया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समुदाय से आती हैं, इसलिए उनके साथ इस तरह का व्यवहार पूरे देश, खासकर आदिवासी समाज के लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल राष्ट्रपति का ही नहीं, बल्कि भारत के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है। इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। वहीं गृह मंत्रालय ने भी इस घटना को लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए इसे गंभीर विषय बताया है।