अरावली पहाड़ी से सटे गांव खेड़ला के आबादी क्षेत्र में इन दिनों तेंदुआ बार-बार दिखाई दे रहा है। तेंदुआ गांव के तालाब में प्यास बुझाने के लिए आता है और आसपास के आबादी क्षेत्र में कुत्तों व अन्य जानवरों का शिकार करने के लिए छिपकर बैठ जाता है। पिछले करीब एक सप्ताह से मौसम में गर्मी बढ़ने लगी है। सुबह-शाम हल्की ठंड रहने के बावजूद दिन में सूर्य की तपन बढ़ने से गर्मी का अहसास होने लगा है। बढ़ती गर्मी के कारण अरावली पहाड़ियों में बने बरसाती जलाशयों का पानी धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। ऐसे में वन्य जीव अरावली पहाड़ियों से निकलकर आसपास के गांवों में बने जलाशयों में अपनी प्यास बुझाने के लिए नीचे आ जाते हैं।
पिछले एक सप्ताह से अरावली पहाड़ी से सटे गांव खेड़ला के आबादी क्षेत्र के पास बने तालाब के आसपास तेंदुए को देखा जा रहा है। गांव के निवासी नरेश जांगड़ा ने बताया कि अरावली पहाड़ी के पत्थरों, तालाब के आसपास और आबादी क्षेत्र के पास बने खेल स्टेडियम की दीवार पर भी तेंदुआ बैठा हुआ देखा गया है। आबादी क्षेत्र के आसपास तेंदुआ दिखाई देने से घरेलू महिलाएं सुबह जरूरी काम के लिए भी घर से बाहर निकलने में डर रही हैं।
ग्रामीणों में डर का माहौल:
अरावली पहाड़ियों में रहने वाले तेंदुए गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की तलाश में नीचे की ओर आ जाते हैं। गांव के निवासी राजकुमार ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ साल से तेंदुए अरावली से नीचे आते रहते हैं। इन्हें गांव के मंदिर और तालाब के आसपास अक्सर देखा गया है। तेंदुए कुत्तों की तलाश में आते हैं और कई बार कुत्तों, बकरियों या गाय के बछड़ों को अपना शिकार बना लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में तेंदुओं को कई बार देखा जा चुका है। इस बारे में वन्य जीव विभाग को भी कई बार शिकायत दी जा चुकी है।
वर्जन:
तेंदुआ सामान्यतः शांत स्वभाव का जीव होता है और वह मनुष्यों से डरता है। इसलिए ग्रामीणों को चाहिए कि वे तेंदुए को देखकर घबराएं नहीं और उसके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।