नगर परिषद ने उत्पाती बंदरों को पकड़ने का काम अधूरा छोड़ने वाली एजेंसी को नोटिस जारी करते हुए 7 दिन में लिखित जवाब मांगा है। जवाब न देने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। नगर परिषद ने शहर में करीब 3 माह पहले उत्पाती बंदरों को पकड़ने के लिए एक एजेंसी को ठेका दिया था, जिसमें एक बंदर पकड़ने का मेहनताना साढ़े 1200 रुपये तय किया गया था। एजेंसी ने करीब 150 बंदर पकड़े, लेकिन उसके बाद बिना किसी सूचना के कर्मचारी नगर परिषद से गायब हो गए। इससे शहर में बंदरों को पकड़ने का कार्य अधर में लटक गया है। परिषद ने एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 7 दिन में जवाब मांगा है। शुक्रवार को जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से काम अधूरा छोड़ने का कारण और कार्य दोबारा शुरू करने की समय-सीमा पूछी गई है। एजेंसी द्वारा जवाब न देने पर उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
बिजली लाइनों पर बढ़ रहा खतरा:
उत्पाती बंदरों के आतंक से जहां घरेलू महिलाएं अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं, वहीं बिजली निगम को भी हर माह आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिजली की लाइनों पर बंदरों के झूलने से बार-बार फॉल्ट हो रहे हैं। फॉल्ट के दौरान लगने वाली आग से कनेक्शन और मीटरों को भारी नुकसान हो रहा है। निगम के एसडीओ मुकेश गौड़ ने बताया कि बंदरों के कारण लाइनें पोल से नीचे की ओर अधिक झुक रही हैं, जिससे फॉल्ट की आशंका बढ़ जाती है।
वर्जन:
बंदर पकड़ने वाली एजेंसी को नोटिस जारी कर दिया गया है। 7 दिन में जवाब न देने पर जमा अग्रिम राशि जब्त कर ली जाएगी और टेंडर जारी कर कार्य किसी अन्य एजेंसी को सौंप दिया जाएगा। (सुनील कुमार रंगा-कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद सोहना)