तेलंगाना के मुलुगु ज़िले के मेदाराम में 28 से 31 जनवरी तक आयोजित होने वाली आदिवासी देवियों सम्मक्का और सरलम्मा की महा जातरा (महायात्रा) में इस राज्य के साथ-साथ छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और अन्य क्षेत्रों से लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने द्विवार्षिक महायात्रा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इस उत्सव को विश्व के सबसे बड़े आदिवासी आध्यात्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। महायात्रा 28 जनवरी को शाम 6 बजे आदिवासी पुरोहितों द्वारा सरलम्मा, गोविंदराजू और पगीदिद्दाराजू की प्रतिमाओं को वेदी पर स्थापित करने के साथ शुरू होगी।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि देवी सम्मक्का की प्रतिमा 29 जनवरी को शाम 6 बजे वेदी पर स्थापित की जाएगी। राज्य सरकार ने लगभग 6 महीने पहले ही इस उत्सव की तैयारियां शुरू कर दी थीं और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 19 जनवरी को देवी सम्मक्का और सरलम्मा के पुनर्निर्मित मंदिर का उद्घाटन किया था। राज्य सरकार ने 101 करोड़ रुपए की लागत से आदिवासी देवताओं सम्मक्का, सरलम्मा, गोविंदराजू और पगीदिद्दाराजू की वेदी का पुनर्निर्माण कराया है।
वर्ष 2026 की महायात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 150 करोड़ रुपए की लागत से विकास कार्य भी किए गए। श्रद्धालुओं के आगमन एवं प्रस्थान, बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं सहित इस महोत्सव के आयोजन में 21 सरकारी विभाग और लगभग 42,000 कर्मी शामिल हैं। सरकार ने महायात्रा क्षेत्र को आठ प्रशासनिक क्षेत्रों और 42 सेक्टरों में विभाजित किया है।
तेलंगाना सड़क परिवहन निगम (आरटीसी) ने इस उत्सव के लिए 4,000 बसें तैनात करने की योजना बनाई है।
इस भव्य आयोजन के लिए 5,000 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी, सरकारी एम्बुलेंस और 40 बाइक एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार ने डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक आधिकारिक वेबसाइट, एक मोबाइल एप्लिकेशन और एक व्हाट्सऐप चैटबॉट शुरू किया है। सरकार द्वारा महायात्रा को दिए जा रहे महत्व को दर्शाते हुए मुख्यमंत्री रेड्डी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हाल ही में मेदाराम में हुई। यह पहली बार है कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हैदराबाद से बाहर की गई।