तेहरान में अपहरण कर दो युवकों से रंगदारी मांगने का बड़ा मामला सामने आया है। पाकिस्तान से जुड़े अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया। लगातार धमकियों और पैसों की मांग के बीच स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट की टीम ने भारतीय दूतावास के सहयोग से दोनों युवकों को सकुशल रेस्क्यू कराया। गुरुवार सुबह दोनों को कैथल लाया गया। मामले के मुख्य आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। एसपी उपासना ने प्रेसवार्ता में बताया कि 7 सितंबर को गांव सिसला निवासी सोमिल सिंह और जिला जींद के गांव छात्तर निवासी नवीन मोर आस्ट्रेलिया जाने के लिए जयपुर एयरपोर्ट से रवाना हुए थे। शारजाह होते हुए वे तेहरान एयरपोर्ट पहुंचे और फिर कोनार्ट एयरपोर्ट पर उतरे। यह इलाका पाकिस्तान के आपराधिक गिरोहों की गतिविधियों के लिए कुख्यात है। यहां पहुंचते ही कुछ लोगों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया।
आरोपितों ने युवकों और उनके परिवार को बताया कि उन्हें कोनार्ट में 2 दिन रुकना होगा, उसके बाद आस्ट्रेलिया भेज दिया जाएगा। फर्जी ऑस्ट्रेलियाई वीजा भी उनके पास भेज दिया गया था। प्रत्येक युवक के लिए 22 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था और स्वजन को कहा गया कि सफलतापूर्वक आस्ट्रेलिया पहुंचने पर पैसा दे देना। 11 सितंबर को आरोपितों ने सोमिल और नवीन के मोबाइल से ही उनके परिवार कोवाट्सएप कॉल की और कहा कि दोनों का अपहरण कर लिया गया है। बदले में 80 लाख रुपये मांगे गए। धमकी दी गई कि अगर रकम नहीं दी तो दोनों को या तो मार दिया जाएगा या अफगानिस्तान में बेच दिया जाएगा।
पाकिस्तान के नंबरों और अन्य माध्यमों से लगातार फोन आते रहे। अपहरणकर्ताओं न युवकों को टॉर्चर कर वीडियो बनाकर परिवार को भेजे। डर से स्वजन ने 10 लाख रुपये आरोपितों को दे भी दिए। जब दोबारा पैसों की मांग हुई तो परिजन तत्कालीन एसपी आस्था मोदी से मिले। शिकायत पर तितरम थाना में केस दर्ज कर जांच एसडीयू को सौंपी गई। भारतीय दूतावास के जरिए ईरान सरकार से पत्राचार किया गया और साइबर सेल से आरोपितों की जानकारी जुटाई गई।दूतावास की मदद से कराया रेस्क्यू: युवकों की जान की सुरक्षा को लेकर स्वजन ने दोबारा 35 लाख रुपये भी आरोपियों को दे दिए। इसके बाद स्पेशल डिटेक्टिव यूनिट प्रभारी एसआई रमेश सिंह के नेतृत्व में एएसआई तरसेम कुमार की टीम ने 22 सितंबर को भारतीय दूतावास की मदद से दोनों युवकों को तेहरान से छुड़ा लिया।