
अमेरिका के साथ ताइवान की बढ़ती साझेदारी से भड़का चीन, दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ा:
चीन और ताइवान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में ताइवान की राष्ट्रपति लाई छिंग-ते ने अमेरिका का दौरा किया और सैन्य सहयोग को लेकर बातचीत की, जिससे नाराज़ चीन ने ताइवान के चारों ओर “फुल स्केल मिलिट्री ड्रिल” शुरू कर दी है। यह अभ्यास ताइवान की समुद्री और हवाई सीमा के बहुत करीब किया जा रहा है, जिससे युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने घोषणा की है कि यह अभ्यास “संप्रभुता की रक्षा” के लिए है और इसका उद्देश्य “ताइवान की स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश को कुचलना” है। चीनी नौसेना और वायुसेना ने 38 फाइटर जेट, 14 युद्धपोत और ड्रोन से घेराबंदी की है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वे हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर जवाब देने के लिए तैयार हैं। ताइवान ने अपने F-16 फाइटर जेट और एंटी-शिप मिसाइलें तैनात कर दी हैं।
अमेरिका, जो ताइवान को एक ‘सुरक्षित लोकतंत्र’ मानता है, ने चीन से संयम बरतने की अपील की है। पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि “हम ताइवान की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं” और इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां भी तेज कर दी गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह गतिरोध आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस ने भी चिंता जताई है क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से वार्ता और शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन चीन ने कहा है कि ताइवान उसका “अभिन्न अंग” है और किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।