
सोशल मीडिया, बेरोजगारी और पारिवारिक दबाव बना रहे हैं मानसिक बोझ:
हाल ही में NIMHANS (National Institute of Mental Health and Neurosciences) की एक स्टडी के अनुसार, हर 4 में से 1 युवा मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा है। यह आंकड़ा भारत जैसे युवा आबादी वाले देश के लिए बेहद चिंताजनक है।
रिपोर्ट के मुताबिक 15–35 वर्ष की आयु वर्ग के लोग सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग, करियर का दबाव, बेरोजगारी और पारिवारिक तनाव के कारण मानसिक रूप से टूट रहे हैं। इससे आत्महत्या के मामले भी बढ़े हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में छात्रों की आत्महत्या के मामलों में 12% की वृद्धि हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी है। बहुत कम लोग काउंसलिंग या थेरेपी के लिए आगे आते हैं, क्योंकि इसे अब भी सामाजिक रूप से ‘कमज़ोरी’ माना जाता है।
सरकार अब स्कूलों और कॉलेजों में “मेंटल हेल्थ सेल” स्थापित करने की योजना बना रही है। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन को और प्रभावशाली बनाया जा रहा है।