वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच देश का निर्यात दिसंबर महीने में 1.87 प्रतिशत बढ़कर 38.5 अरब डॉलर हो गया लेकिन आयात में तेज वृद्धि के कारण व्यापार घाटा मामूली रूप से बढ़कर 25 अरब डॉलर हो गया। बृहस्पतिवार को सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर महीने में देश का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर रहा। इसके साथ ही आयात और निर्यात का अंतर यानी व्यापार घाटा मामूली रूप से बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया। यह नवंबर 2025 में 24.53 अरब डॉलर जबकि दिसंबर 2024 में 22 अरब डॉलर था। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में देश का कुल वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर हो गया।
मुख्य निर्यात क्षेत्रों में शामिल पेट्रोलियम उत्पाद, आभूषण, चावल, प्लास्टिक और चमड़ा की वृद्धि की रफ्तार धीमी रही। अमेरिका द्वारा अगस्त से लगाए गए 50 % शुल्क ने खासकर परिधान जैसे श्रम-बहुल क्षेत्रों के निर्यात पर असर डाला। इस दौरान कुल आयात 5.9 % बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया। इस तरह वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया। व्यापार आंकड़ों पर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संवाददाताओं से कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक रुझान दिखा रहा है।
उन्होंने कहा, मौजूदा रुझानों को देखते हुए हमें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। पिछले महीने निर्यात में तेजी की अगुवाई इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और दवा जैसे क्षेत्रों ने की। इसके साथ अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भारत का निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है। अग्रवाल ने कहा कि कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को अंतिम रूप दिए जाने, निर्यात संवर्धन अभियान और नए बाजारों में विविधीकरण से निर्यातकों को मदद मिल रही है।
दिसंबर में चीन, रूस और पश्चिम एशिया को होने वाले निर्यात में स्वस्थ वृद्धि दर्ज की गई। आयात के मोर्चे पर तेल आयात में 6% की बढ़ोतरी रही जबकि चांदी के आयात में लगभग 80 % की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान सोने का आयात 12 % घटकर 4.13 अरब डॉलर रह गया। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के चेयरमैन ये शक्तिवेल ने कहा कि रेडीमेड कपड़ा क्षेत्र में निर्यात का 2.89 प्रतिशत की दर से बढ़ना यह दर्शाता है कि उद्योग वैश्विक चुनौतियों के बावजूद जुझारू और अनुकूलनशील बना हुआ है। निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने इन आंकड़ों पर कहा कि निर्यात में लगातार बढ़ोतरी भारतीय निर्यातकों की मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्यातक वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अवसरों का लाभ उठा रहे हैं और नीतिगत समर्थन से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ रही है।