दिल्ली की एक अदालत ने 2019 के हत्या के एक मामले में आरोपी को आरोप साबित नहीं होने के आधार पर बरी कर दिया।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को सच हो सकता है से सच ही है तक ले जाने में विफल रहा, जो कि आरोपी को दोषी ठहराने के लिए आवश्यक था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भूपिंदर सिंह आरोपी विशाल के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे जिस पर 12 अगस्त 2019 को करोल बाग के एक पार्क में वीरेंद्र को चाकू मारने का आरोप है। अदालत की ओर से 11 नवंबर को जारी आदेश में कहा गया, इस अदालत को यह मानने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिन परिस्थितियों पर भरोसा किया गया है वे पूरी तरह से स्थापित नहीं हुई हैं और वे निर्णायक नहीं हैं।
अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्य की शृंखला को साबित नहीं कर सका….।
इसमें यह भी कहा गया कि घटना एक भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र (पार्क) में हुई, लेकिन अभियोजन पक्ष ने एक भी गवाह से पूछताछ नहीं की। इसमें कहा गया कि अभियोजन पक्ष द्वारा गवाहों से पूछताछ न करना तथा इसके पीछे का कारण स्पष्ट न करना, जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा करता है।
देश बंधु गुप्ता रोड पुलिस थाने में विशाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया था।