बिहार अल्पसंख्यक आयोग ने राज्य में मुस्लिम समुदाय के लोगों को बांग्लादेशी बताकर भीड़ द्वारा पीटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए पुलिस से ऐसी वारदातों पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी ने पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में यह बात कही है। यह चिट्ठी राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में लौटने के करीब 2 महीने बाद सामने आई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में बलियावी ने कहा कि ऐसी घटनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय आतंकित महसूस कर रहा है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय द्वारा सुझाए गए उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए इन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की।
बलियावी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता हैं, जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करते हैं। अपने 2 पन्नों के पत्र में उन्होंने अलग-अलग जिलों की तीन घटनाओं का हवाला दिया है, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बांग्लादेशी बताकर भीड़ ने पीटा। इनमें से एक घटना मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा के लहेरी इलाके की है, जहां पीड़ित अतहर हुसैन की चोटों के चलते मौत हो गई। पत्र में कहा गया है, ये निंदनीय घटनाएं सांप्रदायिक और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। अल्पसंख्यक और अन्य वंचित वर्ग भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। कानून-व्यवस्था तंत्र पर उनका भरोसा कमजोर होना सरकार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
आयोग के अध्यक्ष ने लिखा कि उच्चतम न्यायालय ने 17 जुलाई, 2018 के अपने फैसले में भीड़ हिंसा और लिंचिंग की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए रोकथाम, उपचारात्मक और दंडात्मक उपायों के विस्तृत निर्देश दिए थे। nउन्होंने बताया कि इन निर्देशों को जुलाई, 2018 में एक परामर्श के जरिए राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों को अक्षरश: लागू करने के लिए भेजा गया था। बलियावी ने सरकार से इस बाबत सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि बलियावी कई मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर मुखर रहे हैं, जिनमें वक्फ विधेयक भी शामिल है, जिसे संसद में जदयू के समर्थन से पारित किया गया था। इस बीच, बिहार का गृह विभाग इस बार उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी के पास है जो सरकार के पिछले कार्यकालों के दौरान मुख्यमंत्री कुमार के पास होता था।