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अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस घोषित करने की मांग, दिल्ली में हुई पत्रकार वार्ता

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17 सितम्बर अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस घोषित हो इस संदर्भ में Constitution Club of India में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता को अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस की आयोजन समिति अध्यक्ष नीति देब और मरघट वाले हनुमान मंदिर (दिल्ली) के पंडित वैभव महारज जी व सुनील भारद्वाज ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। अपने सम्बोधन में आयोजन समिति अध्यक्ष नीति देब ने कहा कि राज राजेश्वरी माँ त्रिपुर सुंदरी के उपासक परम पूज्य जगतगुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर यज्ञ सम्राट 1008 हरिओम जी महाराज विगत लगभग 35 वर्षों से निरंतर यज्ञ कर रहे हैं, उनका सारा जीवन यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण संतुलन और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित है। पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक असंतुलन को देखते हुए, उन्होंने समाधान के रूप में यज्ञ को घर-घर तक ले जाने का संकल्प किया है।

इस दृष्टि से पूज्य महाराज जी पिछले 3 वर्षों से देश और दुनिया में अपने शिष्यों और धर्म प्रेमियों के माध्यम से 17 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस के रूप में मना रहे हैं। नीति देब ने कहा कि 17 सितंबर को सृष्टि के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती है और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिवस है। ये दोनों शुभ अवसर भारत और सनातन धर्म के लिए बहुमूल्य हैं। जैसे हमने योग को, आयुर्वेद को और अन्न को दुनिया में पुनः नई पहचान दिलाई है, आज समय की मांग है कि 17 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस घोषित करके यज्ञ को घर-घर तक पहुंचाया जाए। इसलिए महाराज जी का उद्देश्य है कि सरकार 17 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस के रूप में घोषित करे। साथ में इसके लिए जनता भी जागृत हो इसलिए इस बार पूज्य हरिओम जी महाराज का लक्ष्य एक लाख कुण्ड देश और दुनिया में प्रज्ज्वलित करना है। इसी श्रंखला में मरघट वाले हनुमान मंदिर (दिल्ली) के पंडित वैभव जी महारज की अध्यक्षता में दिल्ली में भी 108 कुंडीय शिव-शक्ति महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।

पंडित वैभव महाराज ने कहा कि 108 कुंडीय शिव-शक्ति महायज्ञ पर्यावरण शुद्धि, विश्व शांति, प्राकृतिक संतुलन, सामाजिक समरसता और विभिन्न वायरस एवं अकाल महामारी से रक्षा की कामना से पूज्य सन्त-महंत, ऋषि-मुनियों और ब्राह्मणों की गरिमामई उपस्थिति में सम्पन्न होगा। पंडित वैभव महारज ने कहा कि सितम्बर महीने में बरसात के कारण जहरीले मक्खी-मच्छर उत्पन्न होते हैं, जो ने केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, बल्कि वो कई बार जानलेवा भी होते हैं। इस दृष्टि से भी यज्ञ दिवस का महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने यज्ञ का महत्व बताते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता में यज्ञ को कर्मयोग का पर्याय माना गया है, गीता के मुताबिक, यज्ञ को जीवनदर्शन माना गया है और यह कर्म करने की शुभ प्रेरणा है। गीता में यज्ञ को आत्म शुद्धि की प्रक्रिया माना गया है। यज्ञ से जुड़े कर्मों को कर्तव्यकर्म माना गया है। यज्ञ से जुड़े कर्मों को करने से मनीषियों का पवित्र होना होता है।

यज्ञ से जुड़े कर्मों से धन, सौभाग्य, वैभव, दीर्घायु, यश, कीर्ति और अनेक अलौकिक शक्तियाँ मिलती है। यज्ञ में आत्मिक प्रगति के साथ-साथ राष्ट्र की प्रगति भी होती है। यज्ञ एक विशिष्ट वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने जीवन को सफल बना सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग बड़ी धूम-धाम से 108 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन कर रहे हैं, हमने दिल्ली के सभी सांसदों को, सभी विधायकों को और माननीय मुख्यमंत्री जी को भी इसके लिए निमंत्रण दे रहे हैं। पंडित वैभव शर्मा ने बताया कि दिल्ली में आयोजित होने वाले महायज्ञ में विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं, दिल्ली प्रदेश के विभिन संत-महात्मा और विभिन्न पंथ-संप्रदाय के प्रमुख लोग भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा ये यज्ञ हमें सामाजिक समरसता की भी प्रेरणा देगा, इस नाते से स्लम बस्तियों के लोगों को भी यजमान बनाया गया है, वो लोग सपरिवार इस महायज्ञ में आहुति डालेंगे और सामूहिक भोजन प्रसाद ग्रहण करेंगे। उन्होंने कहा कि पूरा देश 17 सितम्बर को अंतर्राष्ट्रीय महायज्ञ दिवस के रूप में मनाएं और एकजुट होकर अपने बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।
इस अवसर पर सुनील भारद्वाज ने बताया कि ढाई सौ से ज्यादा कार्यकर्ता इस महायज्ञ की तैयारियों में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग विभाग बना दिए हैं, लगभग 28 विभागों के अंतर्गत व्यवस्थों को बांटा गया है। इस अवसर पर आयोजन समिति सदस्य सुनील भारद्वाज, प्रवीण वाधवा और सुंदर चौधरी मौजूद रहे।

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