होली का त्यौहार करीब आते ही हवाओं में उल्लास घुलने लगा है, लेकिन इस मस्ती के बीच आपकी सेहत पर भारी धातुओं का साया भी मंडरा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बाजार में मिलने वाले चमकीले सिंथेटिक रंग न केवल आपकी त्वचा की रंगत छीन सकते हैं, बल्कि आंखों की रोशनी के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
केमिकल का ‘कॉकटेल’ है सिंथेटिक रंग:
ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड अस्पताल की वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनाली गुप्ता बताती हैं कि रंगों को अधिक चमकदार और पक्का बनाने के लिए उनमें कॉपर, लेड, मर्करी और कैडमियम जैसे भारी तत्व मिलाए जाते हैं। डॉ. सोनाली के अनुसार, “ये रसायन त्वचा की प्राकृतिक नमी सोख लेते हैं, जिससे एलर्जी, लाल चकत्ते और जलन की समस्या आम हो जाती है। संवेदनशील या ड्राई स्किन वाले लोगों, विशेषकर अस्थमा के मरीजों को इससे अल्सर तक होने का खतरा रहता है।
बचाव के टिप्स:
होली खेलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे और पूरे शरीर पर नारियल या सरसों का तेल लगाएं। त्वचा को रंगों के सीधे संपर्क से बचाने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें। एलर्जी होने पर अक्सर लोग टूथपेस्ट या एंटीसेप्टिक लगा लेते हैं, जो नुकसानदेह हो सकता है। प्रभावित हिस्से को केवल साफ पानी से धोएं। आंखों को बचाने के लिए सनग्लासेस पहनें और रंग गिरने पर आंखों को बिल्कुल न मसलें।
विशेषज्ञ की सलाह:
डॉ. सोनाली ने कहा यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर ज्यादा खुजली, जलन या दाने उभरें, तो स्वयं डॉक्टर बनने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। इस होली ‘हर्बल’ को चुनें और अपनी सेहत को प्राथमिकता दें।