मक्खन लाल शिब्बू मल धर्मशाला में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा साधना शिविर का आयोजन किया गया। जिसका समय सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक रहा। सभी साधक जन ध्यान साधना के इस महान यज्ञ में अपना योगदान देने हेतु सम्मिलित हुए। संस्थान के द्वारा समय समय पर साधना शिविर लगाए जाते हैं ताकि सामूहिक ध्यान साधना की दिव्य तरंगों के द्वारा वातावरण को सकारात्मक और दिव्य बनाया जाए।
परम पूजनीय दिव्य गुरु आशुतोष महाराज कहते हैं कि जब ब्रह्मज्ञानी साधक मिल कर ध्यान साधना करते हैं तो सामूहिक ध्यान साधना से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा पुंज इस संपूर्ण धरा पर फैली कलियुग की कालिमा को मिटाने के लिए एक अचूक बाण है। मंच संचालन करते हुए साध्वी राधिका भारती ने ध्यान साधना का महत्व समझाते हुए कहा कि ध्यान साधना वह मृतसंजीवनी है जो मन के विकारों को समूल विनष्ट करके साधारण मानव को देवतुल्य बना देती है।
साधना के दौरान एक साधक केवल आँख बंद करके नहीं बैठता अपितु वह अपने मन के विकारों एवं कर्म संस्कारों से लड़ता हुआ आत्म साक्षात्कार की अवस्था को प्राप्त करता है। अंतःकरण में ही परमात्मा के दिव्य प्रकाश एवं अनहद नाद का अनुभव करते हुए उसकी आत्मा सदैव आनंदित होती है और एक आनंदित आत्मा की ऊर्जा अत्यधिक प्रभावशाली होती है जिसमें अपने आस पास फैली नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने का सामर्थ्य होता है। कई साधक मिलकर जब ऐसी ध्यान साधना में अपनी आहुति डालते हैं तो वह सकारात्मक ऊर्जा पुंज ही ब्रह्मांड की दिव्य तरंगों को धरा पर आकर्षित करता है जिससे प्रेम, करूणा, धैर्य, क्षमा, विवेक जैसे गुणों का संचार होता है। संपूर्ण विश्व में नकारात्मक तरंगों का अंधकार फैला हुआ है उसे समाप्त करने के लिए ब्रह्मज्ञान के द्वारा ध्यान साधना की दिव्य ज्योति को प्रज्वलित करना ही होगा। विश्व शांति की मंगलकामना एवं सर्व जन कल्याण की प्रार्थना के साथ शिविर का समापन किया गया।