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क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, अस्पताल में भीड़

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पलवल क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में बाढ़ के बाद मच्छरों का प्रकोप काभी बढ़ गया है। जिससे लोगों का जीना दूर्भर हो गया। वहीं बाढ़ के बाद ग्रामीणों को बुखार, वायरल, जुखाम-खांसी आदि बीमारियों ने अपनी चपेट में ले लिया है। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि मांग के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग नहीं करवाई जा रही है। जिससे लोगों में नाराजगी है। यमुना नदी में आई भंयकर बाढ़ के बाद बाढ़ प्रभावित खादर क्षेत्र के गांव बलई, थंथरी, राजुपुर, दोषपुर, बागपुर, सोल्डा, भोल्डा, सुलतानपुर, अच्छेजा, अतवा, सतुआ गढ़ी. इन्द्रा नगर, घोड़ी, चांदहट, प्रहलादपुर, गुरवाडी, चांदहट माहौली, हसनपुर, फाट नगर आदि गांवों में मच्छरों आदि का प्रकोप बढ़ गया है। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है। मच्छरों के काटने से लोगों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल आदि रोगों के फैलने का डर सताने लगा है। वहीं बाढ़ के बाद क्षेत्र के लोग बुखार, वायरल, डायरिया, खांसी, जुखाम, आंखो की बीमारी, एलर्जी आदि रोगों की चपेट में आ रहे है।

इसके लिए लोगों को सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाना पड रहा है। खादर के गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़़ के बाद जमीनी पानी दुषित हो गया है। जिसके पीने पर लोगों को तुरंत ही खांसी, जुखा, डायरिया , उल्टी दस्त, आंखों में खुजली जैसी बीमारियों की चपेट में ले लिया है। जिसकी वजह से वे सरकारी व निजी अस्पतालों में जा रहे है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने पानी में कलोरीन की गोली डाल कर पानी का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

जिससे बीमारियों से बचाव हो सकें। लोगों का कहना है कि बाढ़ के बाद हर रोज खादर क्षेत्र के दर्जनों लोग इलाज के लिए पलवल-बल्लभगढ़ के अस्पतालों में पहुंच कर इलाज करवा रहे है। जिससे बीमारियों से बचाव हो सकें। लोगों का कहना है कि मच्छरों के प्रकोप की वजह से लोगों का दिन में बैठना व रात को सोना भी कठिन हो गया है। लोगों का कहना है कि लोगों ने जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीमों से मच्छरों की रोकथाम के लिए फौगिंग करवाने की मांग की है जिससे लोगों का बीमारियों से बचाव हो सकें। लोगों को इलाज पर सैकड़ों रूपए खर्च करने पड़ रहे है। लोगों ने बताया कि बाढ़ के बाद कोई घर ऐसा नहीं होगा जहां कोई ना कोई बीमार ना हो। एक के बीमार होने पर दूसरे भी तुरंत बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

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