नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के पुत्रों यानी साहिबजादों के लिए बाल वीर शब्द इस्तेमाल किए जाने का विरोध करते हुए कहा है कि यह अनुचित है एवं उनकी वास्तविक आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को नहीं दर्शाता। NAPA के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने सोमवार को कहा कि साहिबजादे केवल बहादुर बच्चे नहीं थे बल्कि आध्यात्मिक रूप से जागरूक ऐसे शहीद थे जिन्होंने सिख मूल्यों और न्याय की रक्षा के लिए स्वेच्छा से अपने प्राण न्योछावर किए।
चहल ने एक बयान में कहा कि बाल वीर शब्द उनके बलिदान की गहराई को कम करता है और सिख इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को अत्यधिक सरल बनाकर पेश करता है। उनके लिए सिख परंपरा में प्रचलित सम्मानजनक और ऐतिहासिक रूप से सटीक शब्दों-जैसे साहिबजादे , शहीदी साहिबजादे या छोटे साहिबजादे -का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। NAPA ने कहा कि विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए सिख इतिहास को सुरक्षित रखने के लिहाज से सटीक भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। संगठन ने विभिन्न संस्थाओं और संगठनों से बाल वीर शब्द के इस्तेमाल से बचने और इसके स्थान पर सम्मानजनक शब्दावली अपनाने की अपील की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाए जाने की 2022 में घोषणा की थी।